
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले का करका गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। विकास के दावों के बीच ग्राम पंचायत बुरजी के आश्रित इस गांव के ग्रामीण वर्षों से सड़क, बिजली और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हालात ऐसे हैं कि गांव के लोग मजबूरी में पहाड़ी नाले का लौहयुक्त लाल पानी पीने को विवश हैं।

करीब 60 घरों और 200 से अधिक आबादी वाले इस गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को गांव तक पहुंचने के लिए बीजापुर की ओर से लगभग 8 किलोमीटर और किरंदुल की ओर से करीब 10 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी मुश्किल हो जाता है।

गांव में बिजली का भी अभाव है। रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि दूर पहाड़ियों पर जगमगाती रोशनी दिखाई देती है, लेकिन उनके गांव तक बिजली की लाइन आज तक नहीं पहुंच सकी।

सबसे गंभीर समस्या पेयजल की है। गांव में हैंडपंप या किसी अन्य स्वच्छ जल स्रोत की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ग्रामीण बेलाडीला क्षेत्र से निकलने वाले पहाड़ी नाले के लौहयुक्त लाल पानी का उपयोग पीने और घरेलू कार्यों के लिए कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस पानी के सेवन से कई लोग और मवेशी बीमार पड़ चुके हैं तथा जान तक गंवा चुके हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। किसी के बीमार होने पर उसे चारपाई पर लादकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिसके बाद ही इलाज मिल पाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क, बिजली और पेयजल की व्यवस्था की मांग की, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। ऐसे में करका गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर नजर आता है।
