
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में सतनामी समाज से जुड़ा एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब के ज्येष्ठ पुत्र गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। शुक्रवार को रायपुर स्थित राजीव भवन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली। इस दौरान भूपेश बघेल ने उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया।

खास बात यह है कि गुरु ढालदास साहेब, बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत दास साहेब के बड़े भाई हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस में शामिल होने को छत्तीसगढ़ की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

कांग्रेस में क्यों आए ढालदास?
कांग्रेस प्रवेश के बाद गुरु ढालदास साहेब ने कहा कि उनके पूर्वज भी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस में आने से पहले उन्होंने अपने परिवार से भी चर्चा की थी और उन्हें किसी तरह की रोक-टोक नहीं मिली।
उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन प्रदेश में उन्हें अपेक्षित कामकाज नजर नहीं आ रहा है। ढालदास साहेब ने दावा किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में फिर कांग्रेस की सरकार बनेगी।

कौन हैं गुरु खुशवंत दास साहेब?
गुरु ढालदास साहेब के छोटे भाई गुरु खुशवंत दास साहेब वर्तमान में बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उन्होंने 2023 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और आरंग सीट से कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री शिवकुमार डहरिया को 16,538 वोटों से हराया था।
खुशवंत दास साहेब को चुनाव में 94,039 वोट मिले थे, जबकि शिवकुमार डहरिया को 77,501 वोट प्राप्त हुए थे। राजनीति में आने से पहले वे कृषि और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े रहे।
परिवार की राजनीति में अलग-अलग राह
गुरु बालदास साहेब के परिवार का सतनामी समाज में खास प्रभाव माना जाता है। अब परिवार के दो प्रमुख सदस्यों का राजनीतिक रास्ता अलग-अलग नजर आ रहा है। एक ओर गुरु खुशवंत दास साहेब बीजेपी सरकार में मंत्री हैं, वहीं उनके बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।
ऐसे में गुरु ढालदास का कांग्रेस प्रवेश आगामी राजनीति में सतनामी समाज के समीकरणों पर कितना असर डालता है, यह देखने वाली बात होगी।
