Saturday, March 28, 2026
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भूपेश बघेल ने पहलगाम हमले को बताया ‘झीरम घाटी की पुनरावृत्ति’, केंद्र सरकार पर उठाए सवाल, कहा — दोनों जगह पर सुरक्षा नहीं था, वहीं भी नाम पूछकर मारा गया था…

भिलाई। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस हमले ने 27 परिवारों की खुशियाँ छीन लीं और पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। बघेल ने इस घटना की तुलना छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी नक्सली घटना से करते हुए केंद्र सरकार की सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कांग्रेस द्वारा आयोजित की जा रही ‘संविधान बचाओ रैली’ का भी उल्लेख किया और कहा कि यह रैली देश की लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए ज़रूरी है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर संविधान की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।

आज भिलाई के एक निजी होटल में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पहलगाम की दुखद घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस आतंकी हमले से देश की 140 करोड़ जनता व्यथित है। उन्होंने कहा कि इस आतंकी हमले में 27 परिवार उजड़ गए। जो लोग खुशी के पल बिताने गए थे, वे अब दुखी होकर लौटे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कल ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आज की इस वार्ता में ‘पहलगाम की घटना’ और ‘संविधान बचाओ रैली’ पर बात करने आए है।  उन्होंने कहा कि एक पहलू यह है कि धर्म पूछ-पूछ कर हत्याएं की गई, कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। दूसरा पहलू यह है कि जो लोग घोड़ा चला रहे थे, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पर्यटकों को बचाया. इन दोनों घटनाओं में समानता यह है कि हमने भी झीरम में अपनों को खोया था. वहां भी सुरक्षा नहीं थी और पहलगांव में भी सुरक्षा नहीं थी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम में भी नाम पूछ-पूछ कर मारा गया था। वहां भी 33 लोग मारे गए थे और पहलगाम में भी 27 लोगों की जान गई। पहलगाम में भी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल मदद के लिए सामने नहीं आया। इस घटना ने झीरम घाटी की घटना की याद ताज़ा कर दी। हमारे सभी नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की, शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही. लेकिन भाजपा की सोशल मीडिया टीम ने सिर्फ ‘धर्म पूछ-पूछ कर मारा’ को ही मुख्य मुद्दा बना दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सहायता क्यों नहीं पहुंची? इसका जिम्मेदार कौन है? इंटेलिजेंस फेलियर का जिम्मेदार कौन है?

संविधान बचाओ रैली को लेकर पूर्व सीएम बघेल ने कहा कि आज राष्ट्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. संविधान को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है. महंगाई लगातार बढ़ रही है और सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने की तैयारी की जा रही है. रायपुर में कांग्रेस के अधिवेशन से पहले ईडी ने कई कांग्रेस नेताओं के घर छापे मारे. अहमदाबाद में भी राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई।

नेशनल हेराल्ड को लेकर बघेल ने कहा कि देश की आज़ादी में नेशनल हेराल्ड से निकलने वाली पत्रिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. यह एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में है. उस संस्था पर आरोप लगाए जा रहे हैं, जो सेक्शन 8 के तहत संचालित है।

भाजपा द्वारा लगाए गए 5 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर कांग्रेस ने कड़ा जवाब दिया है। पार्टी ने कहा है कि जिन पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके परिवार ने सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति समाजहित में दान कर दी है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा के नेता झूठी अफवाहें फैलाकर और दुर्भावनापूर्ण साजिशों के ज़रिए कांग्रेस नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के विरोध में कांग्रेस को निर्देश दिए गए हैं कि अगले 40 दिनों तक लगातार जनजागरण कार्यक्रम चलाए जाएं। इन आयोजनों में ‘संविधान बचाओ रैली’ भी शामिल है, जिसका मकसद संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना है।

जानिए क्या हैं झीरम घाटी हत्याकांड

एक ऐसा हमला जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की झीरम घाटी में हुआ नक्सली हमला भारतीय राजनीति के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक बन गया। यह हमला उस समय हुआ जब कांग्रेस पार्टी ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाल रही थी, जिसका उद्देश्य राज्य में भाजपा सरकार को चुनौती देना था।

नक्सलियों ने सुनियोजित तरीके से कांग्रेस के काफिले पर हमला कर दिया। इस भीषण हिंसा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, विद्या चरण शुक्ल, उदय मुदलियार समेत 30 से अधिक नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षा कर्मी मारे गए। यह हत्याकांड न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरी क्षति और राजनीतिक आघात था। इसे देश का सबसे बड़ा राजनीतिक नरसंहार भी कहा गया।

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