Saturday, August 30, 2025
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Dongargarh student slapped : शिक्षिका के थप्पड़ से फटा 7वीं क्लास के छात्र का कान, सुनाई देना हुआ बंद, इलाज जारी, परिजन न्याय की मांग पर अड़े…

Dongargarh student slapped : शिक्षिका के थप्पड़ से फटा 7वीं क्लास के छात्र का कान,

Dongargarh student slapped : डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित खालसा पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 7वीं के छात्र सार्थक सहारे की ज़िंदगी एक झटके में बदल गई। घटना 2 जुलाई की है। SST की क्लास के दौरान शिक्षिका द्वारा कथित रूप से मारे गए थप्पड़ों में से एक ऐसा भी था, जिसने 13 वर्षीय बच्चे की सुनने की क्षमता को छीन लिया। (Dongargarh student slapped)

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Dongargarh student slapped : न्याय की गुहार

परिजनों के मुताबिक, क्लास में शिक्षिका प्रियंका सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब न दे पाने पर सार्थक को कई बार पीटा गया। घर लौटने पर बच्चे ने मां से कहा – “मम्मी, अब ठीक से सुनाई नहीं दे रहा।” इसके बाद घबराए परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। शुरुआत में डोंगरगढ़ और फिर राजनांदगांव के डॉक्टरों से इलाज कराया गया, लेकिन जब स्थिति गंभीर बनी रही, तो रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, इलाज लंबा चलेगा और पूरी तरह सुन पाने की गारंटी भी नहीं है।

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शिक्षिका पर कार्रवाई का इंतजार

मामले में परिजनों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) बीरेंद्र कौर गरछा को शिकायत सौंपते हुए आरोपी शिक्षिका को स्कूल से हटाने की मांग की है। लेकिन अब तक केवल एक शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है, जिससे परिजन बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई से बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।

यह भी पढ़ें :- national highway 45 : तीन दिन की बारिश ने खोल दी NH-45 की पोल: घटिया निर्माण से धंसी सड़क, ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप

स्कूल प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक न तो कोई संवेदनशील बयान आया है, न ही पीड़ित परिवार से संपर्क किया गया। उल्टा, पूरे मामले को निजी घटना बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है। क्या एक छात्र का स्थायी नुकसान सिर्फ एक नोटिस में सिमटकर रह जाएगा?

बाल सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस घटना ने न सिर्फ स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि शारीरिक दंड जैसी अमानवीय परंपराएं अब भी खत्म नहीं हुई हैं। क्या पढ़ाई में गलती करना इतना बड़ा अपराध है कि उसके बदले बच्चे को जीवनभर की सज़ा मिल जाए?

क्या कहता है समाज?

यह मामला न सिर्फ सार्थक का है, बल्कि उन तमाम माता-पिताओं की चिंता को उजागर करता है, जो हर दिन अपने बच्चों को यह विश्वास देकर स्कूल भेजते हैं कि वे वहां सुरक्षित हैं। अब यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग, प्रशासन और समाज की है कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और दोषियों को जवाबदेह बनाएं।

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Dongargarh student slapped : शिक्षिका के थप्पड़ से फटा 7वीं क्लास के छात्र का कान, Dongargarh student slapped : डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित खालसा पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 7वीं के छात्र सार्थक सहारे की ज़िंदगी एक झटके में बदल गई। घटना 2 जुलाई की है। SST की क्लास के दौरान शिक्षिका द्वारा कथित रूप से मारे गए थप्पड़ों में से एक ऐसा भी था, जिसने 13 वर्षीय बच्चे की सुनने की क्षमता को छीन लिया। (Dongargarh student slapped) यह भी पढ़ें :- BJP Mainpat event : मैनपाट में भाजपा का ‘साइलेंट शिविर’, नेताओं के मोबाइल बाहर – सीख अंदर..! Dongargarh student slapped : न्याय की गुहार परिजनों के मुताबिक, क्लास में शिक्षिका प्रियंका सिंह द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब न दे पाने पर सार्थक को कई बार पीटा गया। घर लौटने पर बच्चे ने मां से कहा – "मम्मी, अब ठीक से सुनाई नहीं दे रहा।” इसके बाद घबराए परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। शुरुआत में डोंगरगढ़ और फिर राजनांदगांव के डॉक्टरों से इलाज कराया गया, लेकिन जब स्थिति गंभीर बनी रही, तो रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, इलाज लंबा चलेगा और पूरी तरह सुन पाने की गारंटी भी नहीं है। यह भी पढ़ें :- Truck fell from bridge : देखिए Live वीडियो: तेज बहाव में बह गया ड्राइवर और ट्रक, कोयला भी पानी में गुम..! शिक्षिका पर कार्रवाई का इंतजार मामले में परिजनों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) बीरेंद्र कौर गरछा को शिकायत सौंपते हुए आरोपी शिक्षिका को स्कूल से हटाने की मांग की है। लेकिन अब तक केवल एक शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है, जिससे परिजन बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई से बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। यह भी पढ़ें :- national highway 45 : तीन दिन की बारिश ने खोल दी NH-45 की पोल: घटिया निर्माण से धंसी सड़क, ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप स्कूल प्रशासन की चुप्पी पर सवाल स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक न तो कोई संवेदनशील बयान आया है, न ही पीड़ित परिवार से संपर्क किया गया। उल्टा, पूरे मामले को निजी घटना बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है। क्या एक छात्र का स्थायी नुकसान सिर्फ एक नोटिस में सिमटकर रह जाएगा? बाल सुरक्षा पर बड़ा सवाल इस घटना ने न सिर्फ स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि शारीरिक दंड जैसी अमानवीय परंपराएं अब भी खत्म नहीं हुई हैं। क्या पढ़ाई में गलती करना इतना बड़ा अपराध है कि उसके बदले बच्चे को जीवनभर की सज़ा मिल जाए? क्या कहता है समाज? यह मामला न सिर्फ सार्थक का है, बल्कि उन तमाम माता-पिताओं की चिंता को उजागर करता है, जो हर दिन अपने बच्चों को यह विश्वास देकर स्कूल भेजते हैं कि वे वहां सुरक्षित हैं। अब यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग, प्रशासन और समाज की है कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और दोषियों को जवाबदेह बनाएं।