
रायपुर। छत्तीसगढ़ में संचालित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालयों में चल रही प्री-प्राइमरी कक्षाओं पर आने वाले शैक्षणिक सत्र में असर पड़ सकता है। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) के नियमों में बदलाव और फंड की कमी को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बीच सवाल-जवाब हुआ।
सदन में उठे आत्मानंद स्कूलों के आंकड़ों पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में कुल कितने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं और उनमें प्री-प्राइमरी (नर्सरी, केजी-1, केजी-2) कक्षाएं कितने स्कूलों में शुरू की गई हैं। साथ ही इन कक्षाओं के लिए नियुक्त शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय संविदा कर्मचारियों की जानकारी भी मांगी।

मंत्री ने दी ये जानकारी
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने लिखित जवाब में बताया कि प्रदेश में कुल 403 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में सभी जिलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की अनुमति दी थी। वर्तमान में 14 जिलों के 54 विद्यालयों में नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 की कक्षाएं संचालित हैं और सभी कक्षाएं जारी हैं।

स्कूलों की संख्या पर घिरे मंत्री
लिखित जवाब के बाद डॉ. महंत ने मंत्री को घेरते हुए कहा कि उनके जवाब में 430 आत्मानंद स्कूल बताए गए हैं, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जवाब में प्रदेश में 751 स्कूल संचालित होने की जानकारी दी गई है। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि दोनों आंकड़े सही हैं। उन्होंने बताया कि 348 स्कूल हिंदी माध्यम के हैं और शेष अंग्रेजी माध्यम के आत्मानंद स्कूल हैं।
प्री-प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर चिंता
डॉ. महंत ने सदन में यह मुद्दा भी उठाया कि आत्मानंद स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को नौकरी से हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर में 18 और बेमेतरा में 4 शिक्षकों को सेवा से अलग किया गया है।
डीएमएफ फंड के कारण आई दिक्कत
मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब में कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन डीएमएफ और अन्य मदों से किया जा रहा था। अब डीएमएफ के नियमों में बदलाव के कारण फंडिंग में दिक्कत आ रही है और वित्त विभाग से भी अनुमति नहीं मिल पाई है। हालांकि जहां कक्षाएं चल रही हैं, वहां संचालन जारी रहेगा और नए सत्र से इसे आत्मानंद स्कूलों की तर्ज पर संचालित किया जाएगा।
11 हजार बालवाटिका खोलने की तैयारी
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार प्रदेश में 11 हजार बालवाटिका शुरू करने की तैयारी में है। मंत्री ने बताया कि आत्मानंद स्कूलों के अलावा राज्य के करीब 38 हजार स्कूलों में भी बालवाटिका संचालित की जाएगी।
प्राचार्यों की कमी भी होगी दूर
मंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में बड़ी संख्या में लेक्चरर्स को प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया गया है और जिन स्कूलों में प्राचार्य के पद खाली हैं, वहां जल्द नियुक्तियां की जाएंगी।
