Sunday, March 15, 2026
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बिलासपुर में ढाबे में खुलेआम शराबखोरी! VIDEO वायरल, क्या थाने में हाजिरी देकर चल रहा खेल? नए प्रभारी के आने के बाद से सकरी थाना चर्चा में..!!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के सकरी थाना क्षेत्र में इन दिनों हाईवे किनारे संचालित कुछ ढाबों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन ढाबों में देर रात तक खुलेआम शराब पीने और पिलाने का सिलसिला चलता है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जबकि नियमों के अनुसार बिना वैध लाइसेंस के किसी भी ढाबे या होटल में शराब परोसना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इलाके के लोगों का कहना है कि नेशनल हाईवे-130 के किनारे हाल ही में शुरू हुए एक ढाबे में देर रात तक शराबखोरी का दौर चलता है। आश्चर्य की बात यह है कि इस गतिविधि की जानकारी आम लोगों को होने के बावजूद पुलिस तक इसकी भनक न पहुंचने पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ढाबे में काम करने वाले एक युवक ने दावा किया है कि आधिकारिक तौर पर यहां शराब पीना मना बताया जाता है, लेकिन कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को “क्वार्टर” यानी शराब की बोतलें दी जाती हैं। युवक का यह भी आरोप है कि थाना स्तर पर कथित रूप से पैसे लेकर ढाबा संचालक को शराब पिलाने की छूट दे दी गई है और इसके बदले हर महीने तय रकम देने की बात भी कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

गौरतलब है कि इससे पहले सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के एक ढाबे से अवैध रूप से शराब बेचने का वीडियो भी सामने आ चुका है, जिसमें एक महिला काउंटर से शराब बेचती नजर आई थी। वहीं दूसरी ओर पुलिस सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। ऐसे में ढाबों में खुलेआम शराब परोसे जाने की बातें पुलिस की कार्रवाई और जमीनी हकीकत के बीच विरोधाभास को उजागर करती हैं।

इधर, सकरी थाना पहले भी विवादों में रह चुका है। कुछ समय पहले थाने में पदस्थ एक आरक्षक का पैसे मांगते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने उसे निलंबित कर दिया था। इसके बाद एक अन्य आरक्षक पर भी अवैध वसूली के आरोप सामने आए, जिसे शिकायत मिलने के बाद लाइन अटैच कर दिया गया।

पहले वायरल वीडियो में संबंधित आरक्षक यह कहते हुए भी सुनाई दिया था कि “थाना प्रभारी को भी जवाब देना पड़ेगा।” ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि मामले की जानकारी उच्च स्तर तक थी, तो कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित क्यों रही।

अब देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद सकरी थाना क्षेत्र में कथित रूप से चल रही इन गतिविधियों पर लगाम लगती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले को किस गंभीरता से लेते हैं और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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