Monday, April 20, 2026
Homeअपराधबिलासपुर में जमीन घोटाले का खेल: फर्जी कागजों से सरकारी जमीन पर...

बिलासपुर में जमीन घोटाले का खेल: फर्जी कागजों से सरकारी जमीन पर कब्जा! करोड़ों का लेन-देन, प्रशासन मौन!!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम लगरा से एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है, जहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए शासकीय जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में करीब ₹2.56 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की बात भी सामने आई है, जिससे आर्थिक अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका गहरा गई है।इस पूरे मामले को लेकर जिला न्यायालय के अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री सहित कई उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी है और तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कैसे हुआ घोटाला?

शिकायत के मुताबिक, ग्राम लगरा के खसरा नंबर 556/1 की वर्ष 2006 की रजिस्ट्री को आधार बनाकर एक फर्जी “लिंक दस्तावेज” तैयार किया गया। आरोप है कि इसी कूट-रचित दस्तावेज के सहारे शासकीय भूमि और सार्वजनिक रास्ते को निजी भूमि के रूप में दिखाकर कब्जा कर लिया गया।

बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फर्जी कागजात तैयार कर जमीन का अवैध खरीद-बिक्री किया।

करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन

मामले में लगभग ₹2.56 करोड़ के लेन-देन को संदिग्ध बताया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई है। इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग को भी शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सीमांकन प्रक्रिया पर भी सवाल

आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों को वैध साबित करने के लिए जमीन का सीमांकन कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिवक्ता ने इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो शासकीय जमीन स्थायी रूप से निजी संपत्ति में बदल सकती है।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

शिकायतकर्ता ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि—

  • तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए
  • निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
  • शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए
  • ₹2.56 करोड़ के लेन-देन की जांच हो
  • शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल हो

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ती जा रही है। अब सभी की नजर इस मामले में प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी साफ किया है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Posts