मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ उपजेल में पदस्थ प्रहरी संतोष तिवारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में प्रहरी कथित तौर पर 50 हजार रुपए लेते नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि, जेल में बंद हत्या के आरोपियों को VIP सुविधा देने के बदले यह रकम ली गई थी।

जानकारी के मुताबिक, प्रहरी संतोष तिवारी आरोपियों के परिजनों के घर पहुंचा था। इस दौरान उसने ‘राधे-राधे’ बोलते हुए पैसों का लेनदेन किया, जिसका वीडियो परिवार के ही किसी सदस्य ने रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
परिजनों का आरोप है कि, प्रहरी ने कुल 1 लाख 30 हजार रुपए की मांग की थी। साथ ही पैसे नहीं देने पर जेल में बंद आरोपियों को प्रताड़ित करने और परेशान करने की धमकी भी दी गई थी। यही नहीं, गवाहों से छेड़छाड़ कर आरोपियों को राहत दिलाने का भरोसा देने के भी आरोप लगे हैं।

बताया जा रहा है कि, मामला गणेश चतुर्थी के दौरान हुई चाकूबाजी और हत्या से जुड़ा है। इस केस में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 7 को सबूत नहीं मिलने पर छोड़ दिया गया, जबकि 3 आरोपी अब भी जेल में बंद हैं। उन्हीं आरोपियों के परिजनों से रिश्वत लेने का आरोप सामने आया है।
वीडियो सामने आने के बाद जेलर संजय खैरावर ने कार्रवाई करते हुए प्रहरी संतोष तिवारी को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय अंबिकापुर केंद्रीय जेल रखा गया है। जेल प्रशासन का कहना है कि, विभागीय जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
इस घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज है और लोग जेल प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

