
बिलासपुर, 10 जुलाई 2026। बिलासपुर के अपोलो अस्पताल पर एक गंभीर मरीज के इलाज और रेफरल प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही का आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की गैर-जिम्मेदाराना व्यवस्था के कारण हैदराबाद के लिए तय एयर एंबुलेंस उड़ान पहले दिन नहीं हो सकी। अस्पताल द्वारा न तो अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही मरीज के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर या आवश्यक लाइफ सपोर्ट टीम भेजी गई। परिणामस्वरूप एयरपोर्ट पहुंचते-पहुंचते मरीज की हालत बेहद गंभीर हो गई और एयर एंबुलेंस टीम ने उसे ले जाने से इनकार कर दिया।

गंभीर बीमारी के बाद किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग में कार्यरत 54 वर्षीय राजकुमार अग्रवाल कुछ दिन पहले कोलकाता यात्रा से लौटने के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। उन्हें दोनों फेफड़ों में संक्रमण (बाइलेटरल निमोनिया), एच1एन1 संक्रमण, श्वसन विफलता और उच्च रक्तचाप की शिकायत थी। अपोलो अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हैदराबाद के यशोदा अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। परिजनों ने करीब 13 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की, जो निर्धारित समय पर बिलासपुर एयरपोर्ट पहुंच गई थी।

अस्पताल ने नहीं दी मेडिकल सहायता
परिजनों का आरोप है कि एयरपोर्ट तक मरीज को पहुंचाने के लिए अपोलो अस्पताल ने अपनी एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया और एक निजी एंबुलेंस संचालक का नंबर थमा दिया। इतना ही नहीं, मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर, नर्स या विशेषज्ञ मेडिकल स्टाफ साथ नहीं भेजा गया। निजी एंबुलेंस में आवश्यक लाइफ सपोर्ट व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी।

एयरपोर्ट पहुंचते ही बिगड़ी हालत
परिजनों के मुताबिक रास्ते में मरीज का ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिरकर 20 से 22 प्रतिशत तक पहुंच गया। एयरपोर्ट पहुंचने पर हैदराबाद से आई एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल एयरलिफ्ट करने से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को दोबारा अपोलो अस्पताल लाना पड़ा। इस दौरान एयर एंबुलेंस के रुकने से अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
अगले दिन विशेष मेडिकल टीम के साथ हुआ एयरलिफ्ट
अगले दिन हैदराबाद के यशोदा अस्पताल से तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बिलासपुर पहुंची। मरीज की हालत स्थिर करने के बाद दोबारा एयरलिफ्ट की तैयारी की गई। इस बार परिजनों ने निजी एंबुलेंस में मौजूद सभी लाइफ सपोर्ट उपकरणों की स्वयं जांच कराई और डॉक्टरों की अनुमति के बाद मरीज को एयरपोर्ट पहुंचाया गया।
ट्रैफिक पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर
मरीज को समय पर एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए बिलासपुर ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश और एएसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में कंट्रोल रूम से ट्रैफिक सिग्नलों का संचालन नियंत्रित किया गया तथा प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल तैनात किया गया। इसके चलते मरीज को कम समय में एयरपोर्ट पहुंचाया गया और बाद में एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना किया गया।
परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
घटना के बाद परिजनों ने अपोलो अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि अस्पताल समय पर एंबुलेंस, विशेषज्ञ डॉक्टर और आवश्यक मेडिकल सहायता उपलब्ध कराता, तो मरीज की जान जोखिम में नहीं पड़ती और एयरलिफ्ट पहले ही दिन संभव हो जाता। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही से उन्हें मानसिक पीड़ा के साथ-साथ लाखों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
