
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में नगर निगम के स्ट्रीट लाइट कार्य के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा अब नगर निगम और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सिरगिट्टी क्षेत्र में 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे लोहे का स्ट्रीट लाइट पोल खड़ा करते समय पोल अचानक बिजली लाइन से टकरा गया। देखते ही देखते पूरे पोल में करंट दौड़ गया और उसे संभाल रहे पांच मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे में चार पुरुष और एक महिला मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है, जहां कुछ की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

घटना शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे सिरगिट्टी मेन रोड स्थित आदर्श नगर पानी टंकी के पास हुई। नगर निगम की ओर से स्ट्रीट लाइट लगाने का काम कराया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के लोहे का भारी पोल खड़ा कर रहे थे। इसी दौरान पोल ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया और कुछ ही सेकंड में पूरा पोल करंट की चपेट में आ गया। पोल को पकड़े सभी मजदूर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल-112 और एंबुलेंस को सूचना दी। पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची तथा लोगों की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों के अनुसार कई मजदूर गंभीर रूप से झुलसे हैं और उनका उपचार जारी है।

सबसे बड़ा सवाल—क्या सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया गया था?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर हाईटेंशन बिजली लाइन के ठीक नीचे काम शुरू करने से पहले क्या आवश्यक सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई गई थी?
सवाल यह भी हैं कि—
क्या बिजली विभाग से लाइन बंद कराने की अनुमति ली गई थी?
क्या नगर निगम और ठेकेदार ने संयुक्त रूप से सुरक्षा योजना तैयार की थी?
क्या मजदूरों को हेलमेट, इंसुलेटेड ग्लव्स और अन्य सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई थी?
क्या मौके पर कोई तकनीकी सुपरवाइजर या सुरक्षा अधिकारी मौजूद था?
यदि इन सवालों का जवाब ‘नहीं’ है, तो यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला माना जा सकता है।

मध्यप्रदेश के मंडला से लाए गए थे मजदूर**
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में घायल सभी मजदूर मध्यप्रदेश के मंडला जिले के निवासी हैं। उन्हें ठेकेदार के माध्यम से इस कार्य में लगाया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों के पास न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण थे और न ही उन्हें हाईटेंशन लाइन के नीचे सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी।
जांच में तय होगी जिम्मेदारी
अब यह पूरा मामला जांच के दायरे में है। यह स्पष्ट किया जाएगा कि कार्य शुरू करने से पहले सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यदि जांच में नगर निगम, ठेकेदार या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
विद्युत सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 11 केवी जैसी हाईटेंशन लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बिजली आपूर्ति बंद कराना, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना, प्रशिक्षित सुपरविजन और सुरक्षा बैरिकेडिंग अनिवार्य होती है। इन मानकों की अनदेखी कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
एक बड़ा सबक
सिरगिट्टी का यह हादसा केवल पांच मजदूरों के झुलसने की घटना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की भयावह तस्वीर भी है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया, तो भविष्य में ऐसे हादसे और भी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में जिम्मेदारी किस पर तय होती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
