Wednesday, January 14, 2026
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पुलिस की अनोखी पहल: अब पुरुषों की शिकायतें भी सुनी जाएंगी पारिवारिक परामर्श केंद्र में, एसएसपी ने खुद ली कमान…

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बढ़ते पारिवारिक विवादों और घरेलू तनावों को संतुलित तरीके से सुलझाने के उद्देश्य से दुर्ग पुलिस ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की शुरुआत की है। अब महिला थाना परिसर स्थित पारिवारिक परामर्श केंद्र में पुरुष पक्ष की शिकायतों को भी उतनी ही गंभीरता और औपचारिकता के साथ सुना और निपटाया जाएगा, जितना महिलाओं के मामलों में किया जाता है। यह व्यवस्था जिले में पहली बार लागू की गई है, जिसका उद्घाटन रविवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल की उपस्थिति में किया गया।

पुरुषों की समस्याओं के समाधान का नया मंच

इस नई प्रणाली के तहत पुरुषों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों—मानसिक उत्पीड़न, घरेलू तनाव, वैवाहिक विवाद, झूठे आरोपों का दबाव, पारिवारिक उपेक्षा जैसे मामलों—की सुनवाई के लिए विशेष रूप से पुरुष काउंसलरों की नियुक्ति की गई है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से पुरुष शिकायतकर्ता यह मांग कर रहे थे कि महिला परामर्श केंद्र में उनके पक्ष को समान रूप से सुना जाए।

उद्घाटन के पहले ही दिन कुल आठ पुरुष आवेदकों की समस्याओं पर काउंसलिंग की गई। इस दौरान एसएसपी विजय अग्रवाल स्वयं उपस्थित रहे और प्रत्येक आवेदक की बात को गंभीरता से सुनते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी मामले में पक्षपात न हो, और दोनों पक्षों को समान सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ विधिक मार्गदर्शन मिले।

लंबे समय से उठ रही थी मांग

एसएसपी अग्रवाल के मुताबिक, लगातार यह शिकायत सामने आती थी कि महिला परामर्श केंद्र में केवल महिलाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि पुरुषों के मानसिक और पारिवारिक संघर्षों को आवश्यक गंभीरता नहीं मिल पाती। इसी असंतुलन को दूर कर परिवारों को टूटने से बचाने और समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

हर रविवार होगी सुनवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक रविवार पुरुष आवेदकों की शिकायतों की नियमित सुनवाई की जाएगी। इसमें वैवाहिक तनाव, घरेलू प्रताड़ना, पारिवारिक झगड़ों, अलगाव या तलाक की स्थिति, बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर विवाद जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। काउंसलिंग टीम दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी, जिससे संभव हो तो रिश्ते को बचाया जा सके या फिर कानूनी समाधान सुझाया जा सके।

कौन-कौन रहे शामिल

काउंसलिंग टीम में पुरुष काउंसलर के रूप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सेवानिवृत्त) अशोक जोशी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। वहीं महिला काउंसलरों के रूप में रत्ना डाकलिया और मोनिका सिंह मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (IUCAW) पद्मश्री तंवर, उप पुलिस अधीक्षक (IUCAW) भारती मरकाम, महिला थाना प्रभारी नीता राजपूत सहित अन्य पुलिसकर्मी भी उपस्थित रहे।

पहल क्यों है महत्वपूर्ण?

  • पुरुषों के मानसिक तनाव को भी औपचारिक मान्यता मिलना
  • समाधान दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर
  • परामर्श केंद्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी
  • फर्जी शिकायतों, गलतफहमियों और गलत कार्रवाई से बचाव
  • टूटते परिवारों को संवाद का अवसर

यह पहल दुर्ग पुलिस की ओर से सामाजिक संतुलन और न्याय सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। उम्मीद है कि इससे न केवल पुरुषों के पक्ष को उचित मंच मिलेगा, बल्कि परिवारों में संवाद और समझ बेहतर होगी, जिससे अनेक रिश्ते टूटने से बच सकेंगे।

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बढ़ते पारिवारिक विवादों और घरेलू तनावों को संतुलित तरीके से सुलझाने के उद्देश्य से दुर्ग पुलिस ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की शुरुआत की है। अब महिला थाना परिसर स्थित पारिवारिक परामर्श केंद्र में पुरुष पक्ष की शिकायतों को भी उतनी ही गंभीरता और औपचारिकता के साथ सुना और निपटाया जाएगा, जितना महिलाओं के मामलों में किया जाता है। यह व्यवस्था जिले में पहली बार लागू की गई है, जिसका उद्घाटन रविवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल की उपस्थिति में किया गया।

पुरुषों की समस्याओं के समाधान का नया मंच

इस नई प्रणाली के तहत पुरुषों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों—मानसिक उत्पीड़न, घरेलू तनाव, वैवाहिक विवाद, झूठे आरोपों का दबाव, पारिवारिक उपेक्षा जैसे मामलों—की सुनवाई के लिए विशेष रूप से पुरुष काउंसलरों की नियुक्ति की गई है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से पुरुष शिकायतकर्ता यह मांग कर रहे थे कि महिला परामर्श केंद्र में उनके पक्ष को समान रूप से सुना जाए। उद्घाटन के पहले ही दिन कुल आठ पुरुष आवेदकों की समस्याओं पर काउंसलिंग की गई। इस दौरान एसएसपी विजय अग्रवाल स्वयं उपस्थित रहे और प्रत्येक आवेदक की बात को गंभीरता से सुनते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया की निगरानी की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी मामले में पक्षपात न हो, और दोनों पक्षों को समान सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ विधिक मार्गदर्शन मिले।

लंबे समय से उठ रही थी मांग

एसएसपी अग्रवाल के मुताबिक, लगातार यह शिकायत सामने आती थी कि महिला परामर्श केंद्र में केवल महिलाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि पुरुषों के मानसिक और पारिवारिक संघर्षों को आवश्यक गंभीरता नहीं मिल पाती। इसी असंतुलन को दूर कर परिवारों को टूटने से बचाने और समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

हर रविवार होगी सुनवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक रविवार पुरुष आवेदकों की शिकायतों की नियमित सुनवाई की जाएगी। इसमें वैवाहिक तनाव, घरेलू प्रताड़ना, पारिवारिक झगड़ों, अलगाव या तलाक की स्थिति, बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर विवाद जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। काउंसलिंग टीम दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी, जिससे संभव हो तो रिश्ते को बचाया जा सके या फिर कानूनी समाधान सुझाया जा सके।

कौन-कौन रहे शामिल

काउंसलिंग टीम में पुरुष काउंसलर के रूप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सेवानिवृत्त) अशोक जोशी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। वहीं महिला काउंसलरों के रूप में रत्ना डाकलिया और मोनिका सिंह मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (IUCAW) पद्मश्री तंवर, उप पुलिस अधीक्षक (IUCAW) भारती मरकाम, महिला थाना प्रभारी नीता राजपूत सहित अन्य पुलिसकर्मी भी उपस्थित रहे।

पहल क्यों है महत्वपूर्ण?

  • पुरुषों के मानसिक तनाव को भी औपचारिक मान्यता मिलना
  • समाधान दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर
  • परामर्श केंद्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी
  • फर्जी शिकायतों, गलतफहमियों और गलत कार्रवाई से बचाव
  • टूटते परिवारों को संवाद का अवसर
यह पहल दुर्ग पुलिस की ओर से सामाजिक संतुलन और न्याय सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। उम्मीद है कि इससे न केवल पुरुषों के पक्ष को उचित मंच मिलेगा, बल्कि परिवारों में संवाद और समझ बेहतर होगी, जिससे अनेक रिश्ते टूटने से बच सकेंगे।