
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के थाना बिर्रा में पदस्थ प्रधान आरक्षक अनिल सिंह अजगल्ले पर एक महिला पीड़िता से कथित रूप से पैसे मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि महिला के मारपीट प्रकरण से जुड़े चालान को अदालत में पेश करने के बदले प्रधान आरक्षक ने उससे अवैध वसूली की कोशिश की। शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस अधीक्षक ने त्वरित और सख्त कदम उठाते हुए आरोपी प्रधान आरक्षक को लाइन हाजिर कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।
कैसे सामने आया मामला
पीड़िता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए लिखित आवेदन में बताया गया कि उसके प्रकरण में तैयार चालान को अदालत में प्रस्तुत करने के लिए प्रधान आरक्षक अनिल सिंह अजगल्ले ने उससे पैसे की मांग की। जब महिला ने राशि देने से इंकार किया, तो आरक्षक ने कथित रूप से धमकी दी कि वह चालान को स्कूटनी में रोक देगा, जिससे केस की न्यायालय की प्रक्रिया प्रभावित होगी। पीड़िता ने इसे गंभीर दबाव और रिश्वतखोरी का मामला बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
एसपी की कड़ी कार्रवाई
शिकायत मिलते ही एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना किसी देरी के आरोपी आरक्षक को थाना बिर्रा से हटाकर लाइन हाजिर करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही विभागीय प्राथमिक जांच के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसके तहत आरोपों की विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में तथ्य सत्य पाए जाने पर आगे कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का स्पष्ट संदेश
पुलिस विभाग ने कहा है कि किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी, पीड़ित पक्ष पर दबाव, या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसी गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि ऐसी घटनाएँ पुलिस की छवि और जनविश्वास को प्रभावित करती हैं, इसलिए सभी आरोपों की पारदर्शी ढंग से जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिसिंग में अनुशासन और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।


