
रायपुर। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित चरण पादुका योजना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। करीब 50 करोड़ रुपये की जूता खरीदी से जुड़े टेंडर पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार पर पारदर्शिता की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टेंडर की शर्तों में कथित बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। वहीं इस मामले में न्यायालय की कार्रवाई के बाद विवाद और गहरा गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सबसे कम दर देने वाली कंपनी को काम नहीं दिया गया और निविदा की कुछ शर्तों में बदलाव कर कथित रूप से एक विशेष पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। कांग्रेस का कहना है कि चरण पादुका योजना को भाजपा सरकार ने ‘मोदी की गारंटी’ से जोड़कर प्रचारित किया था, इसलिए इस योजना से जुड़े विवाद बेहद गंभीर हैं।

राज्य सरकार ने इस वर्ष लगभग 12.50 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका वितरित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए लगभग 50 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। कांग्रेस का आरोप है कि हितग्राहियों के लिए बनाई गई योजनाओं में भी कथित रूप से कमीशनखोरी और प्रभाव का खेल चल रहा है।
वन विभाग में भी उठने लगे सवाल
विपक्ष का आरोप है कि चरण पादुका टेंडर विवाद कोई अलग मामला नहीं है, बल्कि वन विभाग में निविदाओं और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि तेंदूपत्ता खरीदी, गोदाम निर्माण और अन्य विकास कार्यों में भी पारदर्शिता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। विपक्ष ने इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिवहन विभाग के ट्रांसफर विवाद से जोड़कर साधा निशाना
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को हाल के परिवहन विभाग में सामने आए कथित ट्रांसफर और पदस्थापना विवाद से भी जोड़ा है। विपक्ष का आरोप है कि कुछ समय पहले परिवहन विभाग में तबादलों को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित वसूली की चर्चाएं सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि एक के बाद एक विभागों में नियुक्तियों, तबादलों और टेंडरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को सभी मामलों की पारदर्शी जांच करानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासनिक निर्णयों पर प्रभाव और दबाव की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सरकारी व्यवस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार से जवाब और जांच की मांग
कांग्रेस ने चरण पादुका योजना से जुड़े टेंडर की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों से जुड़ी योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चरण पादुका योजना और परिवहन विभाग से जुड़े विवाद आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
