
रायपुर, 13 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार होने जा रहा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने राज्य के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालित करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत दंतेवाड़ा (गीदम), जांजगीर, मनेंद्रगढ़, जशपुर जिले के कुनकुरी और कबीरधाम में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में शुरुआती चरण में 50-50 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, एनएमसी ने पहले निरीक्षण के दौरान कुछ कमियों के चलते इन कॉलेजों को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने आयोग के समक्ष अपील दायर की। अपील के बाद एनएमसी की टीम ने दोबारा निरीक्षण किया और आवश्यक मानकों एवं संसाधनों की समीक्षा करने के बाद पांचों मेडिकल कॉलेजों को सशर्त अनुमति प्रदान कर दी।

इन कॉलेजों का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध होगा। चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम-2019 और स्नातक चिकित्सा शिक्षा मानक विनियम-2023 के तहत आवेदन, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद अनुमति पत्र (Letter of Permission) जारी किया है।

एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल कॉलेजों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान भवन, अस्पताल, फैकल्टी, उपकरण, मानव संसाधन और अन्य सभी बुनियादी सुविधाओं के निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आयोग अनुमति वापस लेने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि मेडिकल कॉलेजों को भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सभी वैधानिक स्वीकृतियां सुनिश्चित करनी होंगी। साथ ही संस्थानों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर फैकल्टी, छात्र प्रवेश, अस्पताल सेवाएं, विभागीय सुविधाएं, ओपीडी-आईपीडी आंकड़े सहित सभी आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों को केंद्र सरकार की नीति के तहत एमबीबीएस की 15 प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय कोटा (AIQ) और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की 50 प्रतिशत सीटें मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के केंद्रीकृत काउंसलिंग के लिए उपलब्ध करानी होंगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इन पांच नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत से प्रदेश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, मेडिकल शिक्षा का दायरा विस्तृत होगा और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
